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geetonkebadal -[3]
Monday, March 28, 2011
मान लूँ कैसे यहाँ अब ,यह धरा मेरी नहीं है, आसमाँ मेरा नहीं है, जिन्दगी मेरी नहीं है, तैरते हैं स्वप्न क्यों फिर इस धरा की हलचलों में , प्यार का कोई बहाना, आज अब मेरा नहीं है..
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मान लूँ कैसे यहाँ अब ,यह धरा मेरी नहीं है, आसमाँ म...
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क्या बचा है इस धरा पर, क्या बचा है आसमाँ में,एक जी...
अमरीका व नाटो देशों की चेतावनी के बाबजूद जब गद्दा...
हो सकता है इस दुनिया में, मंजर सभी तबाही के हों,ले...
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