Friday, May 6, 2011

हाथ के कंगन रखे हैं , कंठ की माला रखी है,
आँख का काजल रखा है, होठ की हाला रखी है,
वक्ष की चूनर रखी है ,देह की मखमल रखी है ,
आग, पानी में लगाती ,प्रीत की ज्वाला रखी है ,
हो सके तो आज इनमें ,प्राण का संचार कर दो,
आपकी इतनी सजीली, सुरमई यादें रखीं हैं ,
हो सके तो आज कोई भेंट में स्वीकार कर लो,
अश्रुपूरित से द्रगों में पूर्णिमायें झाँकतीं हैं,
हो सके तो आज उनमें इक नई झंकार भर दो,

हाथ के कंगन रखे हैं ,कंठ की माला रखी है,
आँख का काजल रखा है ,होठ की हाला रखी है,
वक्ष की चुनरी रखी है, देह की साड़ी रखी है,
आग ,पानी में लगाती ,प्रीत की ज्वाला रखी है ,
हो सके तो आज इनमें प्राण का संचार कर दो,