Saturday, April 2, 2011

चाहता हूँ बाग़ कोई ,याद में तेरी लगा लूँ , पक्षियों को डालियों पर ,डोलने को ही बुला लूँ , चहचहा कर जब कहेंगे ,हाल तेरा वो यहाँ पर , क्या पता उन शोखियों की, छाँव में खुद को भुला दूँ,

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