अवतरित होकर जगत में, इस तरह फिर आ गईं तुम,
काल- भैरब जिन्दगी में ,अफ्सरा- सी छा गईं तुम,
इक चिरंतन सत्य झलका , पारदर्शी -इंगितों में,
स्रष्टि की परिकल्पना में,दामिनी -सी घुल गईं तुम,
चाँद से बातें हुईं जब, चांदनी में घुल गईं तुम,
Friday, February 25, 2011
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