चाँद से बातें हुईं जब, चांदनी में घुल गईं तुम,
रात के नीरव क्षणों में ,रागिनी- सी घुल गईं तुम,
दूर तक कोई नहीं था ,तुम उतरती जा रहीं थीं ,
एक आँचल में लिपटकर ,मोहिनी -सी खिल गईं तुम ,
Tuesday, February 22, 2011
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