ताज फीका पड़ रहा था, वक्त धीमे चल रहा था ,
गुरबतों का इक शहंशाह ,गुलबदन से मिल रहा था ,
चाँद का था बस बहाना ,बात तुमसे हो रही थी ,
रश्मियों की थीं फुहारें , लावनी में धुल गईं तुम ,
चाँद से बातें हुईं जब............................
Wednesday, February 23, 2011
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